सतयुग पर बाबा जयगुरुदेव जी का ज़रूरी संदेश

बाबा जयगुरुदेव जी की बचपन कहानी Baba ji ka bachpan
बाबा जयगुरुदेव जी

समस्त मानस प्रेमियों को मैं पाठक की तरफ़ से जय गुरुदेव, सत्संग प्रेमी भाइयों बहनों परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने जो पूर्व में सत्संग दिया और सतयुग का आह्वान किया। ऐसी परम संत बाबा जयगुरुदेव को मैं नमन करता हूँ। जिन्होंने कलयुग में सतयुग लाने की बात रखी वह पूरा प्रयास जारी है। सतयुग पर बाबा जयगुरुदेव जी का ज़रूरी संदेश तो चलिए परम संत बाबा जयगुरुदेव जी के सत्संग वाणी जो सत्संग पुस्तक से ली गई है शुरू करते हैं।

सतयुग आगवन साकेत महायज्ञ दूसरा

परम संत बाबा जयगुरुदेव जी द्वारा दूसरा सतयुग आगवन साकेत महायज्ञ, परम संत बाबा जयगुरुदेव जी द्वारा दूसरा सतयुग आगवन साकेत महायज्ञ अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे 25 दिसम्बर 1977 से 5 जनवरी 1978 तक हुआ। किसी के दिल दिमाग़ में वहाँ का नक़्शा वहाँ की उपस्थिति का अंदाजा नहीं था।

एक महात्मा के इशारे पर असंख्य जनसमुदाय आया था। यह सब के लिए हैरत की बात थी। 33 करोड़ देवता यज्ञ में उपस्थित थे और उन्होंने जनता की खुशहाली के लिए प्रस्ताव भी पास किए. जिनकी घोषणा बाबा जी ने की।

बाबा जी ने कहा है कि यदि कोई शासक जनता को खुशहाल बनाना चाहता है तो, दिल्ली की भूमि पर बैठकर खुशहाल नहीं बना सकता है। गांधी महात्मा चूक गए, किंतु हम चूकने वाले नहीं हैं। गांधीजी केवल राजनीति के साथ जुड़े थे और हम धर्म के साथ चल कर काम करेंगे। धर्म सब में एक है, एक आत्मा है और एक परमात्मा है। इस बात को सोचना चाहिए.

आदित्य परिवर्तन होगा

सारे विश्व के लोग भारत भूमि को सजदा करने लगेंगे। सतयुग भारत में स्थापित होगा। सारे विश्व को यहाँ की विभूतियाँ नचाया करती थी वही वक़्त आने वाला है। चीन, अमेरिका, रूस नहीं बचेंगे। तथा छोटे-छोटे मुल्क की क्या बात है। भारत की भौतिक प्रगति आध्यात्मिक प्रगति को देखकर विश्व के लोग दांतो तले उंगली दबाएंगे।

भारत और ओतारी शक्तियों का एक ऐसा केंद्र बनेगा कि सारा विश्व यहाँ के लोगों को गुरु मानने लगेगा। मैं यह जानता हूँ कि हमारी बातें लोगों को अटपटे उल्टी मालूम होते हैं। महात्माओं की भाषा जल्दी समझ में नहीं आती है। निकट में आने पर समझ में आने लगती हैं।

मैंने देवताओं से कहा कि भारत का सम्मान होना चाहिए और उन्होंने प्रस्ताव पास कर दिया, महान आत्माओं का प्रभाव होगा। वह महान आत्मा शासन की बागडोर संभाल लेंगे। फिर चाहे राज्य किसी को दें, रावण मार कर राज्य एक वागडोर किसी को दिया जा सकता है। देवताओं ने स्थापित कर दिया है।

सतयुग आगमन साकेत महायज्ञ तृतीय

सतयुग आगमन साकेत महायज्ञ तृतीय काशी विश्वनाथ बम भोले की नगरी मैं, गंगा तट रेती पर फैले चौड़े मैदान में दशाश्वमेध घाट के उस पार 15 से 25 फरवरी 1979 तक संपन्न हुआ। जिसमें लगभग 2 करोड लोगों ने भाग लिया। एक इतिहास रचा गया बाबा जी ने कहा भारत वर्ष धर्म क्षेत्र भूमि है।

जहाँ के कण-कण में धर्म के बीज हैं। हमारे अंदर भी जब उस धर्म का प्रदभाव हो जाएगा तो, हम इस भूमि की पवित्रता को समझने लगेंगे, इस भूमि की विशेषता दृष्टिगोचर होने लगेगी। भारतवर्ष में आध्यात्मिक बाद उतरने जा रहा है।

सतयुग आएगा याद रखिए एक झटके में ही सारी दुनिया जाग जाएगी, भारत विश्व की महान शक्ति बनेगा। इसके पहले ऐसे विपदाएँ आएंगे जिन्हें तुमने देखा नहीं है। कुदरत के एक डंडे में अकल आ जाएगी।

बाबाजी का 88 दिन का काफिला

16 माह का मौन रखने के पश्चात बाबाजी ने एक काफ़िला निकाला, 88 दिन का उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 6 फरवरी 86 को काफला 12 प्रांतों का था और यात्रा 10000 किलोमीटर से अधिक थी। बनो पर्वतों घटिया नगरों और महानगरों की परिक्रमा का काफ़िला जन भावनाओं के सर्वे का काफ़िला जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता है और ना ही हिसाब लगाया जा सकता है।

कापला जिसमें बड़े-बड़े अनुभव किए, जिसे कलमबद नहीं किया जा सकता है। ऐसे अद्वितीय काफ़िला निकाला बाबा जयगुरुदेव ने एक संकल्प के साथ काफिले का काफ़िला था। कारो, जीपों, मोटर, मेटाडोर, मोटरसाइकिल, स्कूटर का यद्यपि यह काफ़िला साइकिलों के लिए नहीं था। फिर भी गुरु महाराज की दया का बल लेकर कुछ साइकिल यात्रा निकल पड़े थे।

बाबाजी का संकल्प था जो इनको दर्शन देगा, दर्शन करेगा, उनकी एक मनोकामना पूरी हो जाएगी। मनोकामना जो लाभकारी हो, आहितकारी नहीं, इस प्रचंड काफिले की फ़िल्म तैयार की गई. यात्री इतने थे कि कोई गिन नहीं सकता।

बाबा जी ने अपना संदेश सुनाया और कहा कि

जगह-जगह बाबा जी ने अपना संदेश सुनाया और कहा कि सब लोग धर्म पर आ जाएँ। मांस शराब के सेवन से आत्मा भटक जाएगी और 8400000 योनियों में चली जाएगी। आप भटक गय है और कुदरत सजा देने को तैयार खड़ी है। महात्मा उसे रुके हुए हैं और चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोगों के गुनाहों की माफी दिला दिया जाए.

जो बात मान लेते उनकी रक्षा हो जाएगी, सब लोग दिन में खेती दुकान दफ्तर का काम करो, शाम को बच्चों की सेवा, फिर थोड़ा समय निकालकर भगवान का भजन करो। तो बराकात मिलने लगेगी। परिवर्तन होगा इसे कोई रोक नहीं सकता। चाहे आकाश टूटे या धरती फट जाए, लेकिन परिवर्तन अवश्य होगा।याद रखिए बाबा जी के मुंह से निकली हुई बात इधर-उधर होने वाली नहीं है।

दूसरा शहीदी काफ़िला 80 दिनों का

दूसरा शहीदी काफ़िला 80 दिनों का 8000 किलोमीटर 12 प्रांतों का बाबा जी ने निकाला 26 दिसम्बर 86 से 15 मार्च 1986 तक का जिसमें वैचारिक क्रांति का बिगुल बजा दिया। इस काफ़िला ने युग परिवर्तन का संकेत दिया और जनमानस को झकझोरता जगाता निरंतर आगे बढ़ता रहा और त्रिवेणी संगम इलाहाबाद पर इसका समापन हुआ।

बाबा जी ने कहा अभी आपने दुख तकलीफ है कहाँ देखी, वह सब आगे आ रही हैं। सब लोगों से विनम्र प्रार्थना है कि शाकाहारी हो जा और शराब पीना छोड़ दो, अब वक़्त आ गया है जब भारत वर्ष में विश्व में परिवर्तन का कारण बनेगा।

त्रेता में विश्वयुद्ध का कारण भारतवर्ष था। द्वापर में-में विश्वयुद्ध का कारण भारतवर्ष था और वर्तमान में भारतवर्ष को ही कारण बनना होगा। चीन के समस्त वैज्ञानिक प्रगति को दूर करके उसे नष्ट कर दिया जाएगा। विश्व के अन्य देशों में भी बहुत कुछ होगा। भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उतरेगा और उसकी भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति को देखकर लोग दांतों तले उंगली दबाएंगे।

विश्व के सभी राष्ट्र मिलकर भी

अंततः उसे अपना गुरु मान लेंगे विश्व के सभी राष्ट्र मिलकर भी भारत पर आक्रमण करें, फिर भी वह उसे जीत नहीं पाएंगे। भारत में नए सिरे से गठन होगा। राष्ट्र संघ और सुरक्षा परिषद् भारत में चली आएगी। इंटरनेशनल मुस्लिम एसोसिएशन के नियंत्रण पर बाबा जी का कार्यक्रम लखनऊ अमीनाबाद पार्क 21 मई 1993 को हुआ।

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अनेक मुस्लिम संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया संयोजक जनाब ख्वाजा मोहम्मद राय साहब ने कहा कि भाइयों इतिहास गवाह है कि जब-जब हिंदुस्तान पर मुसीबतें आई, जब-जब यह ज़ुल्म हुए, तब-तब अल्लाह की तरफ़ से संत सूफी और अच्छे लोग भेजे गए. जिन्होंने अच्छे विचार वाद की बरकत की,

बाबाजी उन्हीं संत और ओलिया में से एक हैं। जो अल्लाह की तरफ़ से भेजे गए हैं और जो ज़ुल्म में हो रही है उसे उनके खिलाफ जिहाद छेड़ने, यह सिफ़ारिश नामा इंटरनेशनल मुस्लिम लायर एसोसिएशन की तरफ़ से दिया जा रहा है।

बाबा जी ने कहा मैं कोई फ़क़ीर या महात्मा नहीं

बाबा जी ने कहा मैं कोई फ़क़ीर या महात्मा नहीं हूँ, मैं ना कोई ओलिया हूँ, ना कोई पैगंबर और ना कोई अवतारी हूँ। मैं भी आपकी तरह इंसान और आदमी हूँ। जैसे आप हैं वैसे मैं भी हैं और जो हक़ हकूक आपको खुदा ने अधिकार दिए, वह मुझे भी दिया है। आपने उसका उपयोग किया या नहीं किया आप जानो। मैंने उसका उपयोग किया।

मैं मुर्शीद और गुरु के चरणों में गया और अपने गुनाह जो ना मालूम किए, जन्मों में किए होंगे, माफी मांगे उस समय पर उनके समय पर उनके चरणों में मस्तक को रखा और उनकी मेहरबानी और दया लेकर जो उन्होंने उससे रियाज़ और अभ्यास और साधनों किया उनकी हो गई.

अब इस किराए के मकान का नाम सुन ले, मैं आपके सामने बैठा हूँ इस किराए के मकान का नाम “तुलसीदास” एक छोटा-सा दौलत खाना यानी आश्रम मथुरा में जहाँ कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था। मैंने दो परिचय आप को दे दिए और तीसरा परिचय यह है कि मैं सारे हिंदुस्तान में “जय गुरुदेव” नाम का प्रचार कर रहा हूँ।

जय गुरुदेव नाम किसका है

जय गुरुदेव नाम किसी इंसान आदमी या जानवर का नहीं है। मेरा नाम भी नहीं है। तो किसका नाम है? उस परमात्मा का, उस ईश्वर का, उस भगवान का, उस ब्रह्मा का, उस सर्वशक्तिमान का, उस खुदा का उस गॉड का नाम जय गुरुदेव है। मैं उसका प्रचार करता हूँ। सारे हिंदुस्तान में आपके सामने असली बैठा हूँ, नकली नहीं,

मैं ना हिंदू, ना मुसलमान, न ईसाई मैं तो एक आदमी हूँ। एक इंसान हूँ, वेद शास्त्रों में जो कहा उसको मैं कह करता हूँ। जो बाइबिल ने कहा उसको मैं करता हूँ। मगर एक बात सोचने की है कि मोहम्मद साहब क्यों आए? या मुसलमानों को सूचना है, राम क्यों आए, या हिंदुओं को सोचना है। ईसाई क्यों आए? यह ईसाइयों को सोचना है।

तीनों धर्म मजहबओं की किताबों पुस्तकों में क्या लिखा हुआ है। जब हर धर्म के लोग हर जाति के लोग अपने-अपने मानव इंसानी कर्म से दूर हो जाते हैं, मानव धर्म से दूर चले जाते हैं। यह जानवर पशु जैसे इंसान इंसानों का काम होने लगता है।

धर्म की स्थापना हक़ीक़त

इसको देखो धर्म की स्थापना हक़ीक़त को बताने के लिए कोई ना कोई आपके सामने हर समय आया। मुसलमानों की किताबों में लिखा है कि जब मुसलमान भाई अपने मज़हब ईमान अपनी हक़ीक़त से दूर हो जाएंगे तो, 14 सदी के अंत में एक फ़क़ीर खुदा का पैगाम लेकर ज़मीन पर उतरेगा और सारे इंसान जाति को इंसानियत का हक़ीक़त का पैगाम सुनाएगा।

कुरान में क्या लिखा है कि वह फ़क़ीर सबको पैगाम खुदा का सुनाएगा। उन किताबों में लिखा हुआ है। हजारों वर्ष पहले ऐसे मामूली होता है कि फ़क़ीर हजारों बस आगे की चीज देखते हैं। जैसे अभी दिखाई देती है।

जब फ़क़ीर खुदा का पैगाम इंसानों को सुनाने का काम शुरू करेगा, उस समय हिंदुस्तान के गाँव गांव की सभी सड़कें काली हो जाएगी। हजारों वर्ष पहले जब तारकोल का नाम भी किताबों में नहीं था। उस समय उस फ़क़ीर ने लिखी थी। गाँव गांव की सड़कें काली हो जाएगी। क्या आपको कभी इस तरह की हक़ीक़त का पता था।ईसाइयों की किताबों में लिखा हुआ है कि मैं जा रहा हूँ। अपने पिता के पास द्वारा फिर आऊंगा, तुम लोग इबादत करते रहना। गरीबों की सेवा करते रहना।

हिंदुओं की किताबों में लिखा

हिंदुओं की किताबों में लिखा हुआ है कि जब धर्म लोप हो जाएगा, सत्य प्रेम और न्याय से लोग दूर हो जाएंगे। लोगों के ह्रदय में दया नहीं रहेगी, अपने ऊपर महात्माओं पर किताबों पर कोई विश्वास नहीं रहेगा और भगवान का भी विश्वास खो बैठेंगे। ऐसी अवस्था में भारत भूमि पर एक महान आत्मा का जन्म होगा।

आगे बहुत कुछ होने वाला है। सूखा, अकाल, भुखमरी, महंगाई, टैक्सों की बढ़ोतरी, महंगाई भूकंप कोलाहल आतंकी अदृश्य जो देखे नहीं भविष्य में आने वाले हैं। आने वाले वह मार्ग को यदि बदलना चाहते हो तो, समदर्शी मानव पुरुषों में रहने वाली लोगों को जगाने वाली फ़क़ीर इन सब की खोज शुरू कर दीजिए.

कुशल राजनीति वह है जो अच्छे लोग से इमदाद यानी मदद ले, भौतिक शांति सद्भावना के लिए राष्ट्रीय एकता के लिए, धर्म राष्ट्र, धर्म निरपेक्षता और प्रजा की हिफ़ाज़तके लिए, आप लोग इन दोनों को चूक गए हो, तो आने वाले समय में पछताना पड़ेगा।

खुदाई हुकुम नामों पर यकीन

मुसलमानों की खुदाई हुकुम नामों पर यक़ीन भी करना और ग़ौर भी करना है। खुदा का हुक्म है सव जिस्मो में मेरी रूह है। जो मेरी रूह पर ज़ुल्म करता है मैं उसे सजा देता हूँ। मुझे जानना चाहते हो और मेरी दीदार करना चाहते हो तो, जिस्मों में रहने वाली रूह पर रहम करो और सब की ख़िद्मत करो। तब तुम्हारे जिस्म पाक होगा और इबादत की ख़्वाहिश होगी।

हिंदुओं भगवान का संदेश यदि मुझे पाना है तो मानव शरीर में मेरी आत्मा रहती हैं। निष्कपट निस्वार्थ होकर उसमें मुझे मानकर उसकी सेवा करो, एक पत्थर बेल पालो में क्यों लड़ते हो, मानव शरीर में चेतन परमात्मा और जीवात्मा रहती है। उसको पहचानने के लिए उन महापुरुषों के पास जाओ, जिन्होंने अपने आप को पहचाना और भगवान का साक्षात्कार किया।

वह रास्ता बताएंगे यदि चूक गए तो समय पूरे होने पर, यह सीधे घसीट कर तुम्हें नरक में ले जाएंगे और कोई तुम्हारा साथ ना दे सकेगा। हाय-हाय करेंगे चिल्लायेंगे। बाबा जी अनुरोध करते हैं कि अपनी रूह पर रहम करो, अपनी जीवात्मा पर दया करो, संत और फ़क़ीर सबके होते हैं। उनकी तरफ़ से किसी के लिए भेदभाव नहीं होता है। जैसे डॉक्टर सबके लिए है। कोई भी मरीज आकर सब की दवा करता है। जय गुरुदेव

पोस्ट निष्कर्ष जय गुरुदेव

प्रेमियों सत्संग परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा समय-समय पर दिए गए, जनमानस संदेश के कुछ महत्त्वपूर्ण अंश जो बाबा जयगुरुदेव सत्संग पुस्तिका के द्वारा लिए गए महत्त्वपूर्ण अंशों को पढ़ा। आशा है आपको परम संत बाबा जयगुरुदेव जी का यह संदेश अच्छा लगा होगा। भविष्यवाणी अच्छी लगी होगी। इस सत्संग शब्दों को अपने सोशल नेटवर्क पर जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। जय गुरुदेव।

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