Chhoti Si दुनिया लगेगी जब वहाँ से देखेंगे || यह दुनियाँ बहुत छोटी

यह छोटी-सी दुनिया है ज्ञानी महात्मा मिलेंगे तब अंदर का विशाल दृश्य देखेंगे। तब यह आभास होगा जब पूर्ण ज्ञानी महात्मा मिलेंगे। हम इस संसार में हम रह रहे हैं यह एक Chhoti Si दुनिया है। हम इसी शरीर में रह करके, इसी भूमंडल पर शरीर को रख कर के, महात्माओं की दया से ऊपरी मंडलों का सफर कर सकते हैं। हम ऊपर की दुनिया देख सकते हैं और यह नीचे की दुनिया बहुत छोटी-सी लगती है। महात्माओं ने अपने सत्संग के माध्यम से सब कुछ बताया है, क्योंकि महात्मा सब कुछ देखते हैं बस हमें पूर्ण ज्ञानी महापुरुष की जरूरत है।

Chhoti Si दुनिया लगेगी जब वहाँ से देखेंगे
Chhoti Si दुनिया लगेगी जब वहाँ से देखेंगे

Chhoti Si दुनिया लगेगी

महात्माओं की दया से हम उस रास्ते को प्राप्त कर सकते है और अपनी साधना करते रहे तो इसी शरीर में रहते हुए, हम शरीर को इसी जमीन पर बैठा के ऊपर के मंडलों का सफर कर सकते हैं। यह तभी संभव हो सकता है जब हमें पूर्ण ज्ञानी महापुरुष मिले जो हमें सच्चा रास्ता बताएँ।

इस शरीर से निकलने का क्योंकि जब तक रास्ता सही नहीं होगा। तब तक हम कैसे ऊपर पहुँच सकते हैं और ऊपर से नीचे का नजारा देख सकते हैं। महात्मा बताते हैं कि ऊपर से जब अपनी दिव्य दृष्टि से लोग देखते हैं तो यह दुनिया बहुत Chhoti Si लगती है।

हम भी पहले नहीं जानते थे

हम भी इसी तरह से अज्ञानी हो करके गुरु गये थे। क्या ज्ञान रहा कुछ नहीं। यह उनके चरणों की कृपा है, यह उनकी महान दया है। समझ गए कि हम ऐसे अज्ञानी आदमी, मूर्ख आदमी जो इतने दिनों तक नहीं समझ सकता था, उसने अपने चरणों में बैठा करके इतनी ऊंची दात दी।

whe क्या जानते थे कि धर्म क्या है, हमको क्या मालूम था कि पुस्तकें क्या चीज हैं, हम क्या जानते थे कि आत्मा क्या है? हमको यह भी ज्ञान नहीं था कि मनुष्य कहते किसको हैं हमको यह भी ज्ञान नहीं था कि इन्सान संसार में क्यों आया करता है।

यह कुछ नहीं मालूम था। यह गुरु की कृपा थी, यह गुर की दया थी कि चरणों में बैठा करके इतना बड़ा विज्ञान दिया जिसके लिए तमाम दुनियाँ लालायत थी। जिसको पाने के लिए लोग जंगलों में जाया करते थे और खोजते-खोजते थक जाया करते थे।

विज्ञानी महात्मा मिल जाय (Gyani Mahatma)

अपने-अपने धर्म को बरबाद कर दिया करते थे। जो शरीर हृष्ट पुष्ट हुआ करता था उसको जला दिया करते थे और तब आस लगाते थे कि कोई ऐसा विज्ञानी महात्मा मिल जाय। अरे भाई, तब भी नहीं मिल पाते थे। अरे भाई, हम लोगों के बड़े भाग हैं हम लोगों के ऊपर तो बड़ी कृपा है कि बड़े अच्छे सरल तरीके से, हृष्ट पुष्ट कपड़े लत्ते पहने हुए समाज का पूरा व्यवहार करते हुये मिल गये।

हम लोग भाग्यशाली है (Bade BhagySali)

तो हम लोग भाग्यशाली हैं। जिन लोगों ने अपने शरीरों को जला दिया और गलाने के बाद में शरीर छोड़ दिया लेकिन फिर भी महापुरुषों की प्राप्ति एक जमाने में न हुई। लेकिन हम लोगं को तो मिल गये। तो जिनकी महान शक्तियाँ मिल गयीं और जिनके अन्दर में परमात्मा की दुनियाँ (Duniya) में जाने का रास्ता है और मिल गया है, उनको उधर ही चले जाना चाहिए। इधर नहीं है।

यह दुनियाँ बहुत Chhoti Si

ऊपर से देखने में यह दुनियाँ बहुत छोटी है और वहाँ खड़ा हो करके देखें कि भाई यह दुनियाँ है Chhoti Si. हिन्दुस्तान अमेरिका चीन जापान इंग्लैण्ड आदि जो छोटे-छोटे मुल्क हैं, कहने में इतने मालूम होते। यह नक्शा है उसमं सारे मुल्क छोटे से नक्शे में आ जाते हैं और उसमें सब देख लेते हैं कि क्या है कौन-सा किस स्थान और किस देश में।

वहाँ छोटी-सी रचना यह कौन? मृत्यु लोक मण्डल है। आपको यकीन होना चाहिए कि जब हम ऊपर चढ़ जाते हैं वहाँ से हम इस तरफ में देखते हैं कि कौन चलता है, क्या करता है, क्या बोलता है, किसको धोखा देता है, किसको मार रहा है, किसको काट रहा है, कौन जहर देता है, चीर फाड़ करता है। वह सब दिखाई देता है। छोटा-सा मुल्क है तमाम संसार जो बाहर की दोनों आँखों से दिखाई देता है। लेकिन बुद्धि से दूसरी तरफ हम क्या सोचते हैं कि बहुत बड़ा संसार है।

वहाँ घूमते करोडों वर्ष लग जायेगा (Millions Of Years)

जब हम उन आँखों से देखते हैं तो देखते हैं कि इतना छोटा है लेकिन जब चर्म आँखों से देखते हैं तो विस्तृत रूप जो संसार है जो चेतन मण्डल है वे इतने बड़े हैं कि उनमें झूमते घूमते करोड़ों बरस खतम हो जायेगा फिर भी घूम न सकोगे।

यहाँ तो हवाई जहाज पर बैठकर 15 दिन या समय में पूरे मुल्क का सैर कर लेंगे पर वहाँ घूमते करोडों वर्ष लग जायेगा और घूमते-घूमते आप थक जांय इतने पर भी मुश्किल है। उन देशों को छोड़ करके हम लोग इतनी थोड़ी-सी जगह पर आये हुए है और फिर क्या करते है, अपनी बस्ती बसाते हैं ऐसी गन्दगी को छोड़ो अपने घर को चलो।

इसलिए ऐसा समय रखा गया, होली का अवसर दिया गया। इसलिये जो होना था सो हो गया हम तो जिस काम के लिए घूम रहे थे वह यही था।

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निष्कर्ष:

दोस्तों आपने ऊपर दिए गए लेख के अनुसार Chhoti Si दुनिया लगेगी जब वहाँ से देखेंगे। यह तभी संभव हो सकता है जब हमें पूर्ण महात्मा मिल जायेगे। आशा है आपको ऊपर दिया गया सत्संग पोस्ट जरुरु पसंद आया होगा। पढ़ने के लिए Thanks। जयगुरुदेव।

और सत्संग: Antar Drishti से क्या देख सुन सकते है? आँख के अन्दर का रास्ता

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