आत्मा का पिता कौन है? आत्मा का घर। Sabka Malik कैसे मिलेगा

महानुभाव हमारा असली पिता कौन है? आत्मा का सच्चा घर व Sabka Malik कौन है? महात्मा अपने आध्यात्मिक प्रैक्टिकल से सब कुछ बताते हैं। आध्यात्मिक शिक्षा के अनुसार अपने पिता व आत्मा का घर मालूम कर सकते हैं। यदि हमें Sabka Malik उसके बारे में सही जानकारी चाहिए तो, हमें महात्माओं की शरण में जाना चाहिए, वह भी पूर्ण महात्मा होना चाहिए, जिन्होंने आपने इसी शरीर में रहकर आत्मा और परमात्मा का साक्षात्कार किया हो, संसार और Malik को अपने दिव्य दृष्टि से देखता हो। ऐसी महात्मा मिल जाए और हमारे हमें वह रास्ता दे, हम उस रास्ते पर चलें और प्रैक्टिकल करें तभी संभव हो सकता है। चलिए महापुरुषों ने क्या कहा जानते हैं।

Sabka Malik कैसे मिलेगा
Sabka Malik कैसे मिलेगा

आत्मा का पिता (Aatma Ka Pita)

हम इस संसार में जन्म लेते हैं और इसी शरीर को उत्पन्न करने वाले और जन्म से साथ देने वाले, शिक्षा देने वाले, हमारे दुख में साथ देने वाले, इस सांसारिक माता-पिता तो होते हैं लेकिन हमारा असली पिता कौन है? यह जानना जरूरी है। यह शरीर के पिता तो हमारे पिता है ही, मगर इस शरीर के अंदर बैठी हुई जीवात्मा जिसके द्वारा यह शरीर चलायमान है इसका असली पिता कौन है? इस चीज पर हमें गौर करना जरूरी है।

क्योंकि हमारे अंदर जो भी Ruh जीवात्मा बैठी है, वह कहीं ना कहीं से उत्पन्न तो जरूर हुई होगी? यदि उत्पन्न हुई तो उसका घर भी होगा और उसका पिता भी होगा। यह सब महात्मा अपने सत्संग के माध्यम से सब कुछ बताते हैं और आप आने पढ़ने वाले हैं। इस वेबसाइट में यह आपको सारी जानकारी मिलेगी।

आत्मा का घर (Aatma Ka Gar)

हम समझते हैं कि जिस में हम रहते मौज मस्ती करते हमारा घर है। लेकिन आत्मा का घर भी होता है? जिस प्रकार आत्मा का पिता होता है, उसी प्रकार आत्मा का घर भी होता है। उस घर तक हमें पहुँचने के लिए हमें एक शब्द रूपी सीडी की जरूरत है। या यूं कहें कि महात्माओं के द्वारा दिया गया नाम दान और भजन प्रक्रिया, साधना, उस डोर को पकड़ कर के, उस रस्सी को पकड़ कर के हम अपनी आत्मा के घर पहुँच सकते हैं।

हर कोई के अंदर यह पावर छिपा हुआ है। मनुष्य के अंदर मन बुद्धि चित्त सब कुछ होते हुए भी समझ नहीं सकता है जब हमें कोई जानकार महापुरुष मिलेंगे तो वह हमें आत्मा का घर बताएंगे और जाने का रास्ता भी देंगे।

यदि हम उस रास्ते पर चलते गए, महात्माओं ने बताया कि आपको आगे जाकर को यह मिलेगा, कहीं वह मिलेगा, यदि हम चलते गए वह हमें निश्चय ही जो महात्मा बताते हैं वह रास्ते में मिलेगा तो, हम निश्चय ही अपने घर पहुँच जाएंगे।

क्योंकि महात्मा तो उस घर से आए हुए हैं। हम भी, हमारी आत्मा भी, उस घर से आई है। लेकिन हम सब भूल गए हैं महात्मा सबको जगाते हैं बताते हैं और समझाते हैं। असली रास्ता देते हैं अपने आत्मा का घर, परमात्मा (Sabka Malik) का घर सब कुछ बतलाते हैं। बस हमें चलने की जरूरत है।

आत्मा का पिता कोई और है

तो हम कहा से आये? और इसलिए इस परिवर्तनशील देश में रहते हैं। हमारा स्थल यहाँ नहीं रहने का है। हमारा यह घर रहने का नहीं है। यदि यह घर रहने का होता तो हमेशा हम अपनी माता पिता (Mata Pita) की गोद में रहते। ये हमारे माता पिता यहाँ के नहीं हैं।

जो बीच के हमारे माता पिता हैं वे बनावट के हमारे माता पिता (Mata Pita) हैं यह पंच भौतिक शरीर को लेकर। हमारे माता पिता, हमारी आत्मा के माता पिता नहीं हैं। वह माता पिता हमारा कोई और है। उसके पास में हमको कब जाना होगा? जब वह महात्मा मिलेंगे तब वहाँ का रास्ता तुम्हें बताया।

सत्तपुरुष के पास में पहुँचने के लिए (Sabak Malik)

तो मैंने वही रास्ता उस परमात्मा परम पिता के पास में उस सत्तपुरुष के पास में पहुँचने के लिए अपने प्रेमियों को उस गुप्त भेद का गुप्त रूप से बताया है कि अपनी गुप्त शक्ति को जगा लें। उसे जगाकर के वहाँ पहुँच जांय।

अपनी-अपनी साधनायें मुकम्मल रूप से तदरूप होकर के बाहर के ध्यान को और धारणा को और बाहर की इच्छाओं को त्याग करके लगे रहो, अपने काम में और अन्तिम अवस्था तक तुम्हारा काम निश्चय होगा और मैं सबके साथ में हूँ। फिर कोई आदमी यह न कहे कि मैं यहाँ नहीं हूँ।

अगर तुम मुझको देखना चाहते हो, उस परमात्मा की सत्ता को देखना चाहते हो तो उधर अन्तर्धान होकर के अन्तर सृष्टि में जाओ, महात्मा उधर भी मिलेंगे। जिन लोगों ने उसको पाया है उनको इस बात का विश्वास है कि वह महात्मा उधर भी रहते हैं।

महात्मा सब जगह मौजूद

Mahatma बाहर की शकल और सुरत से बाहर आकर के उपदेश देते हैं और जब अन्तर सृष्टि में धंसा देते हैं तो वहाँ पर भी वे दर्शन देंगे, उधर आप से वार्तालाप करेंगे। उधर जो आपका प्रश्न होगा वह उसका उत्तर देंगे। उधर आप को ले जाकर के परमात्मा से इस आत्मा को मिला देंगे। यह हमारा उन लोगों के लिए उपदेश है जो साधना में लगे हुये हैं।

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महात्मा सब जगह मौजूद इसलिए कोई व्यक्ति किसी स्थान पर रह करके यह न सोचे कि हमारे पास में वह महात्मा नहीं है। हमारे पास में वह परमात्मा मौजूद हैं लेकिन पर्दा की वजह से आप समझते हो कि महात्मा दूर हैं। महात्मा कभी दूर नहीं हैं। महान शक्तियाँ हमेशा वियावान जंगलों में भी हैं आपके साथ में और जहाँ जाओगे वहाँ आपके साथ में भी हैं।

निष्कर्ष:

महानुभाव आपने ऊपर दिए गए लेख के अनुसार सबका मालिक (Sabka Malik) परमपिता परमेश्वर, आत्मा का असली घर और आत्मा का पिता, ऐसे महत्त्वपूर्ण सत्संग बातों को पढ़ा। आशा है आपको यह अनमोल महापुरुषों के वचन जरूर अच्छी लगे होंगे। अपने दोस्त रिश्तेदार और अच्छे लोगों के साथ इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। यदि हमें अपने आत्मा पिता और आत्मा का घर सच्चा मालूम करना है तो हमें पूर्ण महापुरुष की शरण में जाना होगा। वह हमें योग अभ्यास की प्रक्रिया बताएंगे और हम उस रास्ते प्रैक्टिकल करेंगे तो हम निश्चय ही उस महान प्रभु सबका मालिक उसके दर्शन दीदार कर सकते हैं। पढ़ने के लिए धन्यवाद जय गुरुदेव, मालिक की दया सब पर बनी रहे।

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