आरती करहु संत सतगुरु की जय गुरुदेव आरती प्रार्थना

समस्त महानुभावों को जय गुरुदेव, इस वेबसाइट के माध्यम से हम आपके लिए (Jai Gurudev Aarti Prthan) जय गुरुदेव आरती लिरिक्स आपके साथ साझा कर रहे हैं। साथ में आपको इसमें नीचे वीडियो भी मिलेगा। आरती करहु संत सतगुरु की, आरती करूं गुरुदेव की निज भेद बताओ, विनय करू में दोउ कर जोरे, सतगुरु द्वार तुम्हारे। यह आरती हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। आप पढ़े, याद करें और गुरु महाराज की आरती प्रार्थना आपने सच्चे भाव से करें, वह हमारी फरियाद ज़रूर सुनेंगे। जय गुरुदेव,

आरती करहु संत सतगुरु की
आरती करहु संत सतगुरु की

Aarti (आरती) करहु संत सतगुरु की

आरती करहु संत सतगुरु की, सतगुरु सतनाम दिनकर की…
काम क्रोध मद लोभ नशावन, मोहे ग्रसित कह सुरसरि पावन,
कटही पाप कली मलि की, Aarti (आरती) करहु संत सतगुरु की…

तुम पारस संगति पारस तव, कलिमल ग्रसित लोहे प्राणी भाव,
कंचन करही सुधर की, आरती करहु संत सतगुरु की…

भूलेहूँ जो उन संगति आवे, कर्म धर्म तेहि बाँधी न पावे,
भय न रहे यम डर की, Aarti करहु संत सतगुरु की…

योग अग्नि प्रगटहि तिन के घट, गगन चढ़े सुर्त खुले बज्रपट,
दर्शन हो हरि की, आरती करहु संत सतगुरु की…

सहस कवल चढ़ी त्रिकुटी आवे, शून्य शिखर चढ़ बीन बजावे,
खुले द्वार सत घर की, Aarti करहु संत सतगुरु की…

अलग अगम का दर्शन पावे, पुरुष अनामी जाए समावे,
जयगुरुदेव अमर की, (आरती) करहु संत सतगुरु की…
जय जय-जय गुरुवर की, आरती करहु संत सतगुरु की…

Aarti करूं गुरुदेव की निज भेद बताओ

आरती करूं गुरुदेव की निज भेद बताओ
आरती करूं गुरुदेव की निज भेद बताओ

आरती करूं गुरुदेव की निज भेद बताओ,
चरण कमल की छाँह में सुरति बिठायो…

जनम जनम के पाप को जिन दूर हटायो
मो सम पतित पुनीत करि ह्रदय लगाओ…

दीन दयालु दया करी दियो शब्द जहाजा,
सुरती चढ़े आकाश में धर अनहद नादा…

सुरति चली निज लोक को मन परम हुलासा,
सतगुरु मिल गए राह में, ले परम प्रकासा…

अभिनंदन निज लोक में कर किन्नर देवा,
भाग्य सराहे सुरत कर लावे बहू सेवा…

काल कर्म के फांस से लियो जीव बचाई,
गुरु दयाल दया कर निज घर पहुँचाई..

विनय करू में दोउ कर जोरे सतगुरु द्वार तुम्हारे

विनय करू में दोउ कर जोरे सतगुरु द्वार तुम्हारे

विनय करू में दोउ कर जोरे, सतगुरु द्वार तुम्हारे।
बिन घृतदीप आरती साजु, दोऊ अखियाँ मजधारे…

भाव सहित नित बैठी झरोखे, जोहत प्रियतम प्यारे।
पग ध्वनि सुनु श्रवण हिये अपने, मन के काज विसारे…

जागी सुरत पियत चरणामृत, पियत-पियत हुए न्यारे।
घंटा शंख मृदंग सारंगी, बंसी वीन सुना रे…

जय गुरुदेव आरती करती गावत जय-जय कारे…

पोस्ट निष्कर्ष

महानुभाव जय गुरुदेव अपने ऊपर दिए गए सत्संग प्रार्थना आरती को पढ़ा, आपको जय गुरुदेव आरती लिरिक्स (Jaigurudev Aarti Prathna Lyrics) अच्छा लगा होगा। आप सभी को जय गुरुदेव और आरती प्रार्थना पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। धन्यवाद,

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