Ladai Jhagda || घर में लड़ाई झगड़ा रोकने के उपाय

झगड़ा कब रुकता है जब हमारा मन संतुष्ट हो जाए, मन को समझाया जाए, तभी किसी Ladai Jhagda से बचा जा सकता है। महात्माओं ने घर में लड़ाई झगड़ा रोकने के उपाय और लड़ाई झगड़ा कैसे होता है, कैसे रोका जाता है? इसके बारे में सत्संग के माध्यम से सब कुछ बताया है। चलिए सबसे पहले हम कुछ और टॉपिक को जानते हैं जैसे कि; आपके हमारे घर में रोज लड़ाई क्यों होती है?

घर में लड़ाई झगड़ा रोकने के उपाय
घर में लड़ाई झगड़ा रोकने के उपाय

घर में रोज लड़ाई क्यों होती है (Ghar Me Ladai)

महानुभाव महात्मा दयालु होते हैं और वह हर जीव को सुखी एवं स्वच्छ देखना चाहते है। महात्मा हमेशा निस्वार्थ भाव से मानव सेवा का कार्य करते हैं और अपने जीवो को बुरे कर्मों से बचाते हैं। समझाते हैं मन को कंट्रोल करने के बारे में भी बताते हैं।

यदि हमें किसी चीज की चाह है, थोड़ी-थोड़ी-सी बातों में भी लगभग रोज लड़ाई झगड़ा होता रहता है। ऐसी परिस्थिति में हमें संतुष्टि का मूल मंत्र ज्ञान प्राप्त करना जरूरी है। वह ज्ञान महात्मा अपने सत्संग के माध्यम से सब कुछ बताते हैं घर में रोज Ladai Jhagda हो,

हमारे आपके बीच उसे कैसे संतुष्ट किया जाता है? महात्माओं ने सब कुछ बताया है। क्योंकि जब तक हम अपने मन को संतुष्ट नहीं करेंगे, किसी भी चीज की प्राप्ति के लिए उसका सही विवेक नहीं निकालेंगे, लड़ाई झगड़ा किस बात का। चलिए अब हम जानते हैं महत्त्वपूर्ण अपने सत्संग के माध्यम से क्या बताया है? जानते हैं;

उज्जैन नगरी तीर्थ (Kumbh Ujjan)

मैं गया एक बार उज्जैन नगरी में मुझे याद है जिस समय पर वहाँ कुम्भ हुआ था। वहाँ पहुँचा। नाले के रूप में एक छोटी-सी नदी थी। उसी के किनारे इतना बड़ा कुम्भ लगता है। बताइये आप, कहाँ गंगा और जमुना वहाँ पर तो कुम्भ लगता तो ठीक भी था। लेकिन एक मामूली नाला है।

इतना वहाँ गन्दा नाला हो जाता है जब लोग पहुँचते हैं कि बहता भी नहीं। उसी के किनारे कुम्भ लगता है। अगर वह कुम्भ लगता वहाँ? इतनी पूजनीय हो जाती है कि जिस जगह पर महात्मा निवास करते हैं चाहे वह कुआं हो, चाहे वह बाग हो, चाहे वह दरिया हो, चाहे वह नाला हो।

कोई तालाब हो जिसके किनारे भी महात्मा निवास कर जायेंगे और वह अपना उपदेश कर जायेंगे वहीं कहते हैं तीर्थ हो जायेगा। लोग वहीं जाकर नमन करेंगे, वही जगह तीरथ है, न कि दरियाओं की जगह। वह तो पानी बह रहा है, वह तो बहता है बाहर।

क्या कर्मों का मेल धुलेगा (Karmo Ka Mel)

आप कुएँ पर शुद्धि कर सकते हो और आप बाहर के बहते हुए पानी में भी अपने शरीर को धो सकते हो। बहरहाल यह है कि जहाँ कर्म गया है, न कुएँ के पानी से यह मैल जा सकता है, न दरिया के पानी से। जहाँ दरिया बह रही थी, वहाँ नहाया नहीं लोग उन महात्माओं के पास पहुँचे नहीं मलीन के मलीन।

तीरथ चाले दो जना चित चंचल मन चोर।
एको पाप न धोईया लाये मन दस और॥

गये थे प्रयाग राज में एक पाप धोने के लिए उधर से दस और लेते चले आए।

मीन सदा जल में रहे धोये बास न जाय।

मछली हमेशा पानी में रहती है लेकिन कभी उसकी दुर्गन्ध जाती है? माफ करना। अरे भाई, तुम डुबकी लगाते रहो, लेकिन तुम्हारे अन्दर के वे क्रियामाण कर्म जो शुभ, अशुभ हैं वे धुल सकते हैं? हरगिज नहीं। हाँ ठीक है, अगर उस दरिया में गोता मारो, उस आत्मा को उस जल से धुला दो, तो साफ हो जाओगे।जिसके ऊपर ये कर्म शुभ अशुभ चढ़ चुके हैं।

महापुरुष भेद बतलाते (Mahpurush Ke Wachan)

अब जो इनको कोई समझावे।
सत्तपुरुष का भेद लखावे॥

कहते है कि कई अगर महात्मा आए इन फंसे हुए जीवों को कोई समझा करके यह कहे कि भाई सत्तपुरुष तुम्हारा वह मालिक है। इस रास्ते से मिलेगा। तो कहते हैं;

सो नहिं माने, झगड़ा टाने।
पक्षपात कर ढिंग नहिं आवे॥

कहते हैं भाई मानते नहीं। अगर परमात्मा का पिता का, वह महापुरुष भेद बतलाते हैं तो कहते हैं—

सो नहिं माने झगड़ा ठाने।

कहते हैं नहीं तुम गलत कह रहे हो। आप ठीक नहीं कहते हैं और पक्षपात करने लगते हैं क्या? भाई मैं ठीक कह रहा हूँ तुम गलत कह रहे हो। झगड़ा ठानते हैं। भाई झगड़ा नहीं और क्या है?

झगड़ा नहीं तो और क्या (Ladai Jhagda Nahi)

जहाँ महापुरुषों का उपदेश सत्य रूप में होता हो वहाँ आप झगड़ा करने लगो। Jhagda नहीं तो और क्या? न तो आप सुनने के लिए आओ न आप सुनने के लिए आने दो। हम वहाँ झगड़ा करने लगेंगे समझे कि नहीं। जो चल रहे हैं मार्ग पर उनको भी यह भी चाहते हो कि न चलें। Ladai Jhagda नहीं तो क्या है? समझ गये, मानते नहीं। सत्तपुरुष का भेद बता रहे हैं, उस प्रभु का और कहते हैं कि इस रास्ते से तुम पा लोगे जरूर, जरूर पा लोगे, इसमें कोई सन्देह नहीं।

भाई झगड़ा करते हो और पक्षपात करते हो अपने-अपने जिसको मूर्खता से अज्ञानता से जिस चीज को कर रहे हो, उसका प्रचार करने लगते हो कि; यह ठीक है आपका गलत हमारा ठीक बताइए उलझन नहीं तो क्या है एक तरफ कहाँ गया है

फंसे जाल में पचे कर्म में।
धोखा खाया पड़े भर्म ||

पक्षपात झगड़ा करते हो

आप कोई इनको समझावे तो उल्टा लड़ाई झगड़ा करते हैं। बताइए महात्मा आए हमारे सर काटते रहते हैं जूते मारते रहते हैं महात्माओं को आपको बिल्कुल बताऊँ सच्ची बात की वह महात्मा जब अनुभव भी आए, तब उनको जूते लोग लगाते रहते हैं फिर वह सिर नीचे कर लेते हैं और लो मार लो,

लेकिन उसका जो आखरी रिजल्ट नतीजा होगा। वह बुरा होता है बड़ी दुर्दशा होती है उन लोगों की दुर्गति हो जाती है। देख लिया जाता है कई ऐसी मिसाल पेश आएँ, ऐसे महापुरुषों को जिन लोगों ने तकलीफ पहुँचाई उनकी बड़ी बुरी हालत हुई है।

कुछ मैंने भी देख लिया आपकी मौजूदगी में भी कुछ महापुरुषों से सुना भी है। कहते हैं देखो मालिक का भेद बतलाया सत्पुरुष का जो सबका पिता है और जिससे लोग वंचित हैं भूल चुके हैं अब वह यहाँ दूसरे के जाल में फस गए हो, आप उसका भेद बताने के लिए आते हैं यह सब पक्षपात झगड़ा करते हो, किसलिए, धन के लिए, अपने बच्चों के लिए,

FAQa

घर में कलेश को कैसे दूर करें?

घर में कलेश हो तो ऐसी परिस्थिति में हम यदि महात्मा के दिए हुए वचनों को थोड़ा याद रखें तो कुछ बचाव हो सकता है। संतुष्टि हो सकती है, सहनशीलता हो सकती है। यदि एक दूसरा कुछ कहता है तो थोड़ा सब्र रख करके, उसका शांति से जवाब दिया जा सकता है। यह तो महात्मा गांधी ने भी कहा और भी महापुरुषों ने कहा है कि; थोड़े समय के लिए बेचैन भले ही हो सकते हैं लेकिन उसका जवाब हम शांति से दे सकते हैं।

पति और पत्नी के बीच में झगड़ा क्यों होता है?

अक्सर हम आपके बीच में मनमुटाव या भ्रम कुछ ऐसा कारण बन जाता है, या विचलित मन के कारण कभी-कभी पति पत्नी के बीच भी झगड़ा पैदा हो जाता है। हमें अपने परिवार की जिम्मेदारी के साथ एक दूसरे के रिश्तो को कायम रखते हुए, पति पत्नी पर विश्वास करना चाहिए, धोखा ना करना यह हमें परिवार की जिम्मेदारी सिखाती है और ऐसी परिस्थिति में मनमुटाव जैसी चीजों का शांति से विश्लेषण करके, हम पति-पत्नी के बीच झगड़े और मनमुटाव को दूर कर सकते हैं।

निष्कर्ष

ऊपर दिए गए लेख के अनुसार आपने सत्संग आर्टिकल के माध्यम से महात्माओं के द्वारा दिए गए सत्संग को जाना। इसके अलावा लड़ाई झगड़ा कैसे रोका जाए इसके बारे में भी कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी पढ़ी। आशा है आपको ऊपर दिया गया आर्टिकल Ladai Jhagda. । घर में लड़ाई झगड़ा रोकने के उपाय जरूर अच्छा लगा होगा। अपने दोस्तों को भी शेयर करें पढ़ने के लिए धन्यवाद, शांति बनाए रखें, मालिक की याद रखें, ऊपरवाला हम सबका मददगार होगा। जय गुरुदेव।

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