संतों की वाणी सबको आगाह कर रही, Santo Ki Vani अर्जी हमारी मर्जी आपकी

संतों की वाणी (Santo Ki Vani) सबको आगाह कर रही है और इस जनमानस के लिए अपनी वाणी के माध्यम से, मानव समाज देश और राष्ट्र सुरक्षा व सुधार की बात करने वाले संत फकीर त्रिकालदर्शी बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपनी वाणी में इस जन समुदाय को आगाह किया है और निवेदन किया है कि यदि मान जाओगे तो अच्छी बात है क्योंकि महात्मा जितने भी आए चाहे कबीर साहब की वाणी य किसी भी Santo Ki Vani को माने इससे हमारे जीवन का कल्याण जरूर होता है। संतों की वाणी कभी मिथ्या नहीं जाती है चलिए जानते हैं बाबा जी की वाणी जो सबको आगाह कर रही है अर्जी हमारी मर्जी आपकी चलिए पढ़ते हैं जय गुरुदेव।

Santo Ki Vani
Santo Ki Vani

बाबा जयगुरुदेव-संतों की वाणी (Jaigurudev Santo Ki Vani)

जन-जन में होगी क्रान्ति, हम तुम्हें दिखा देंगे।
रुढ़ि धर्म विवादों को, हम मिटा के दिखा देंगे।

मान अभिमानों को हम, मिटा के दिखा देंगे।
जात पांत के जो हैं झगड़े, उन सबको मिटा के दिखा देंगे।

प्रजा राजा में न एकता, इन सबमें एकता करा देंगे।
शराब मांस मछली खाते, पीते हम मना-मना के अवश्य छुड़ा देंगे।
जिनको न शांति मिल सकी, उनको शांति दिला देंगे। बाबा जयगुरुदेव

यह बाबा जयगुरूदेव जी महाराज का संकल्प है यह तो पूरा होगा। लेकिन हमें अपने को बदलना पड़ेगा, उनके वचनों को सुनना होगा और उस पर अमल करना होगा। हम मानें न मानें लेकिन यह सच है कि सन्त और फकीर त्रिकालदर्शी होते है। इसीलिए वह सबको सावधान करते हैं और बचने का रास्त बताते है। हम मान लेंगे बच जायेंगे, नहीं मानेंगे तो खाई खन्दक में गिरेंगे।

Santo Ki Vani (संतों की वाणी) सबको आगाह कर रही

अब हम सबके सामने दो ही रास्ते है। या हम बाबाजी की बात मानकर अपने को बचा लें या दैविक या भौतिक आपदाओं की खाई खन्दक में गिरकर अपना अस्तित्व खत्म कर दें। बाबाजी ने तो हमेशा से सबको बचाने का प्रयास किया है और आज भी कर रहे हैं।

लेकिन नासमझी के कारण कभी उनको राजनीतिक कहा गया, कभी अराजक तत्व कहा गया, कभी असामाजिक तत्व कहा गया। कहने वाले कहते सुनते अपनी ही क्रिया कर्म की तलवार से खत्म होते चले गये। बाबाजी शाश्वत हैं। आज भी उनकी वाणी सबको आगाह कर रही है कि बच जाइए,

समय खराब है, अपन बचाव का रास्त अपनाइए, अमानुषिक काम छोड़ दीजिए मानवता के काम कीजिए, जीवों पर दया कीजिए, पशु पक्षियों के खून को अपने खून में मत मिलाइए और थोड़ा समय निकाल कर अपनी जीवात्मा के कल्याण के लिए उस मालिक से,

उस खुदा से, गॉड (GOD) से सच्चे दिल से प्रार्थना कीजिए, कि हे सर्व शक्तिमान प्रभु, मालिक, खुदा, अल्लाह, या रब मेरे गुनाहों को माफ कर, मेरी आत्मा को, रूह को (SOUL) सच्चा रास्ता दिखा, जिस पर चल कर मैं अपना लोक और परलोक बना लँ।

वक्त है सच्ची प्रार्थना करने का

Santo Ki Vani हैं अब वक्त है ऐसी सच्ची प्रार्थना करने का, धर्म और मजहब के नाम पर लड़ने झगड़ने का नहीं, जाति पांति के झगड़े का नहीं, निन्दा आलोचना का नहीं। हमने बहुत लड़ लिया, बड़े झगड़े फसादें की, बहुत नुक्ताचीनी की। सिवाय नफरत के हमें मिला क्या? नफरत की ऐसी ज्वाला जली कि इसमें घर-परिवार जल गये जातियाँ समाजे जल गई, सारा देश जल उठा।

इसलिए सारी मानवता बहुत थक गई। अब हर कोई ऐसी छाँव चाहता है जहाँ उसे ठण्डक मिले, आराम मिले, शान्ति और सुकून मिले और यह सब वहीं मिलेगा जहाँ शान्ति के सन्देश होते है, मानव कल्याण के सन्देश होते है, मानव धर्म और मानव कर्म के सन्देश होते है और आत्माओं को रूहों को जगाने के सन्देश होते है। ऐसे सन्देश वह सन्त और फकीर ही देते है जो समदर्शी हैं और सब जीवों में उस प्रभु की अंश जीवात्मा को देखते हैं।

जीवात्मा का कल्याण

सौभाग्य से वक्त का इतना बड़ा वरदान है कि बाबा जयगुरूदेव जैसी महान हस्ती सभी मानव आत्माओं का आवाहन कर रही है, एक नया रास्ता दिखा रही है जो वक्त की माँग है, वक्त की पुकार है। अगर उनकी आवाज सुनकर हम अपने को न बचा सके, न बदल सके,

Santo Ki Vani है कि अपनी जीवात्मा का कल्याण न कर सके तो इससे बड़ा हमारा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। एक उदाहरण है-महाभारत खतम होने के बाद श्रीकृष्ण गान्धारी से मिलने गये। गान्धारी अपने पुत्रों के वियोग में डूबी हुई थीं।

कृष्ण से बोली कि अब क्या लेने आये हो, मेरा वंश तो खत्म कर ही दिया। कृष्ण ने कहा कि मैं तो नहीं चाहता था कि ये विनाश लीला हो, मैंने हर तरह से सबको समझाने की कोशिश की लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं मानी तो मेरा क्या दोष? गान्धारी निरूत्तर हो गयी।

संतों की वाणी अर्जी हमारी मर्जी आपकी

बाबा जयगुरूदेव जी सबको समझा रहे हैं, सबको बदलने का एक मौका दे रहे हैं। नाम योग साधना मंदिर का एक आधार दे दिया है। आप आइए, अपने गुनाहों को माफ कराइये, सच्चे दिल से। अपनी एक मनोकामना पूरी कीजिये। मंदिर का देवता बरकत देगा और आपको चाहिए क्या? इतना बड़ा आधार है। अर्जी हमारी मर्जी आपकी

महानुभाव

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ऊपर दिए गए कंटेंट के माध्यम से आपने यह जानना कि संतों की वाणी सबको आगाह कर रही है। क्योंकि संत महात्मा जो कुछ भी कहते हैं वह मिथ्या नहीं जाता है Santo Ki Vani हमेशा सत्य होती है, जो पूर्ण संत होते हैं उनकी वाणी हमेशा सच होती है। आशा है आपको ऊपर दिया गया जयगुरुदेव सत्संग आर्टिकल जरूर पसंद आया होगा। मालिक की दया सबको प्राप्त हो, जय गुरुदेव

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