Chor ki kahani किसको कितना देना है | चतुर चालाक चोर की कहानी

Chor ki kahani कुछ लोग चतुर चालाक चोर होते हैं। लेकिन महात्मा अपनी दिव्य दृष्टि से सब कुछ देखते हैं Lalach Chor ki kahani आप इस आर्टिकल के माध्यम से पढ़ने वाले है। सत्संग के माध्यम से सुनाई गई काश्तकार चतुर चालाक चोर की कहानी जो स्वामी महाराज ने स्वयं सुनाएँ और मानव समाज के लिए एक उदाहरण पेश किया। आप इस सत्संग आर्टिकल को पूरा पढ़ें चलिए जानते हैं एक चोर की कहानी,

Chor ki kahani
Chor ki kahani

Lalach Chor ki kahani

कास्तकारों के लिए विशेष सूचना अब आपको मोटी बात बतायें सबके सह यहाँ कास्तकार आए हुए हो एक महात्मा जी जंगल में चले गए खेत पकने वाले थे। ये गेहूँ और ये सब चना और जो पकने वाली थी। तो पेड़ के नीचे बैठ गए।

किसी गाँव के लोगों ने देखा कि ये कौन बैठा है। तो गाँव में खबर दी तो गाँव के लोग चलकरके आए कि आप कौन हैं? महात्मा जी बोले—मैं तो हिसाब करता हूँ। क्या हिसाब करने के लिए आए। कि मैं किसको चना देना, किसको गेहूँ देना किसको अरहर देना और किसको कितना मटर देना है।

ये हम फसल लिखने के लिए आए हैं। फसल लिख ली तो कहने लगे कि आप हिसाब कब करोगे? तो कहने लगे कि जब काट कूट कर ले आओगे और जब तुम मांड़-मूड़ कर गेहूँ चना, मटर, अरहर निकाल लोगे तो मैं हिसाब करने के लिए आ जाऊंगा। मुझे जिसको जितना देना है उतना ही तो उन्होंने लिख लिया। तो लोग पूछने लगे हमें कितना देना है। 40 मन, 80 मन, 100 मन, 60 मन सबने लिख लिया।

Chor ki kahani

अपना लिखकर लेके चले गये तो जब खेत पका पकने के बाद में उसको खलिहान में ले गये तो एक आदमी ने सोचा कि ये सब झूठी बात हैं ये कोई लिखापढ़ी करने नहीं आता है। उसने क्या किया कि रात में हंसिया लेकर उसके खेत में से चार गट्ठा गेहूँ उसके खेत में से काट करके अपने खलिहान में जमा कर लिया। उसका तो इतना खेती में होता नहीं था और तमाम गेहूँ जमा हो गया।

दूसरे की चोरी (Chori) करके तो जब वह आ गये विचारे खेत काटकर के खलिहान में ले आये तो भूसे को अलग किया और अनाज को अलग किया तो महात्मा जी आ गये और बैठ गये। लोग दौड़ पड़े कि महाराज हमको कितना देना तो लिखा था 40 मन, 80 मन और 60 मन और 100 मन और इतना देना तो चोर तो चोरी कर (Chor Chori Kar) लाया था वह आया कहने लगा महाराज हमको कितना देना कहे तुमको 25 मन।

कहने लगे तौल लीजिये। तो जब तौला गया तो किसी का 25 मन से ज्यादा एक दाना भी नहीं 60 मन किसी का 40 मन किसी का 100 मन। सबका जितना-जितना लिख लिया उतना सबका। चोर बोला अरे महाराज ये मेरे कांटे लगे मैं रात को कांटों में जंगल में गया तो बबूंल के कांटे बेरियों के कांटे खून निकल आया। ये मेरे पैर फट गये और मैं उसके खेत में से काटकर के ले आया। उधर से जौ काटी मटर काटी, अरहर, गेहूँ काटा वह किधर चला गया।

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अरे, कहने लगे बच्चा ये मेरे पैर में भी ये कांटे लग गये। ये देख ये लगे हुए हैं कांटे कहने लगे आप क्या करते रहे? कहने लगे तू काट करके ले आता था वहाँ जमा करता था और मैं यहाँ से जब चला जाता था। घर में तो गट्ठा उठा करके उसके खेत में पहुँचाया करता था। मुझे देना उतना ही है जितना तेरे हिसाब में है और तूने जो चोरी की है और ये कांटे जो तेरे लगे और तकलीफ हो रही है ये तो तेरी सजा और चोरी की सजा (Chori Ki Saja) अलग मिलेगी।

वह जो तूने चोरी की है उसकी सजा अलग और ये जो तेरे कांटे लगे खून निकल आया इसकी सजा तो कहने का मतलब ये है कि तुम मन का धन कितना भी खेत काटकर जमीन लेकर ये करके चोरी करके डकैती डालकर रात को छीन करके कितना भी धन अपने घर में ले आओ लेकिन वह जो हिसाब कर्ता जो कर रहा है वह बैठा हुआ है वह ब उसके यहाँ पहुँचा देगा।

आपको कुछ मालूम नहीं रहेगा। हमने चोरों से पूछा कि भाई कितना तुमने चोरी की होगी। हमारे पास Chor भी आते है। साफ कह देते हैं हमने चोरी की। कहने लगे कितना धन आपके पास है? कहने लगे एक भी पैसा नहीं बचा सब चला गया। डकैत आये डकैत से पूछा कि भाई तुमने डकैती डाली तो कितना तुमने जीवन में लूटा होगा? कहने लगे कई करोड़ का। कहने लगे एक पैसा नहीं बचा और घर से चला गया।

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तो कहने का मतलब हिसाब कर्ता बिल्कुल सच्चा है। जो पाप का भी हिसाब करता और पुण्य का भी करता है। ये सब और उसका ब्याज वह सब आपको देना है। वह दूसरे को किसी को नहीं देना। इसलिये ये मनुष्य शरीर अनमोल है ये बारबार नहीं मिलता। अबकी बार परमात्मा को प्राप्त करने के लिए इस जीवात्मा को इस जड़ से इस शरीर से निकालने के लिए आपको ये दिया गया है और उसने कह दिया है कि,

मैंने तुमको साफ सुथरा मकान दिया है जैसा हमने दिया है वैसा हमको वापस दे देना। फिर जब वह खड़ा हो जायेगा और तुमने गंदगी भरी तो फिर तुमको मार-मार करके इतना मारेगा कि तुम्हारी नस-नस को तोड़ देगा और इतनी पीड़ा होगी।

निष्कर्ष

महानुभाव सज्जनों आपने ऊपर दिए गए कंटेंट के माध्यम से एक चोर की कहानी (Chor ki kahani) पढ़ी, जो महात्माओं ने स्पष्ट उदाहरण दिया है कि जिसको जितना मालिक को देना है बस अपने ईमानदारी से करते रहो, मालिक अपने आप देगा। यदि हमने चोरी चौपाटी, चालाकी की, तो ऊपर वाला हमसे छीन भी सकता है। आशा है आपको यह ज्ञानवर्धक कहानी अच्छी लगी होगी। मालिक की दया सब पर बनी रहे जय गुरुदेव।

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