जीवों का कल्याण परमात्मा के मिलन का ध्यान कैसे करें । Dhyan Kaise Kare?

Dhyan Kaise Kare (ध्यान कैसे करें) ध्यान योग क्या है इसकी विधि कहाँ मिलेगी अपना meditation केंद्रित करने के लिए हम क्या कर सकते हैं जीव का कल्याण और परमात्मा के मिलन का भेद कहाँ मिलेगा? ऐसे तमाम प्रश्नों का सलूशन आपको इस आर्टिकल में पढ़ने वाले हैं। आप इसे पूरा पढ़ें चलिए शुरू करते हैं

Dhyan Kaise Kare
Dhyan Kaise Kare

Dhyan kaise kare (ध्यान कैसे करें)

ध्यान कैसे करें सबसे पहले हम इसी टॉपिक को जानते हैं। देखा जाए तो ध्यान कहाँ किया जाता है? meditation कैसे किया जाता है? दोनों आंखों के मध्य भाग में जहाँ जीवात्मा बैठी हुई है जहाँ से वह शब्द रस हमारी जीवात्मा तक आता है। ध्यान करना एक meditation प्रक्रिया है। जो हमें परमात्मा से या अलौकिक शक्तियों से जोड़ने का कार्य करती है।

Dhyan Kaise Kare इसके बारे में महात्मा सब कुछ बताते हैं। परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के सत्संग के माध्यम से ध्यान की प्रक्रिया बतलाई जाती है। जीव को परमात्मा से जोड़ने की प्रक्रिया सब कुछ बतलाते हैं।

ध्यान एक ऐसा चेतन मुद्रा है जिसमें आप अपनी SURAT यानी जीव को एकाग्र करके उस बताए हुए योग प्रक्रिया को अपना करके अपनी जीवात्मा की दिव्य दृष्टि खोल सकते हैं। यह सुझाव कहाँ मिलता है इसका उदाहरण महात्माओं के सत्संग में जाने से मिलता है।

काल भगवान (kal bhagvaan) को तुमसे हमदर्दी नहीं

तुमने अच्छा कार्य किया तो तुम्हें स्वर्ग मिल गया, बैकुंठ दे दिया और कुछ ऊपर लोकों में वास दे दिया। यदि बुरे कर्म किया तो नर्कों, चौरासी में चले गये। कहने का मतलब यह है कि काल के देश में ही तुम चक्कर मारते रहे। काल भगवान (Kal Bhagvaan) को तुमसे हमदर्दी नहीं

जितनी भी औतारी शक्तियाँ आईं उन्होंने तुम्हें फंसाने का काम किया। जीवों का कल्याण (Jeev Kalyan) किसी ने नहीं किया। औतारी शक्तियों ने यहाँ आकर अधर्मियों का विनाश किया और धर्म की स्थापना (Daram ki esthapna) की। राम ने यही काम किया। कृष्ण ने भी यही काम किया। चौबीस घन्टे साथ रहने वाले अर्जुन को नर्क दिया तो तुमने तो कृष्ण को देखा

Jeev Ka Kalyan औतारी शक्तियाँ नहीं करती

सामने वालों का कल्याण उन्होंने नहीं किया तो तुम अपना सोच लो। ऊधौ कृष्ण के परम मित्र थे। कृष्ण (Kirsna) जब अपने धाम को जाने लगे तो ऊधौ कहने लगे कि महाराज मुझे भी लेते चलिये। कृष्ण ने कहा कि ऊधौ! तुम बद्रिका आश्रम में चले जाओ और योग करो फिर तुम मेरे धाम को चले

ऊधौ फूटकर रो पड़े और बोले महाराज! जवानी की अवस्था में ही क्यों नहीं बता दिया और अब तो मैं वृद्ध हो गया हूँ योग साधना (Yog Sadhan) कैसे कर पाऊंगा? कृष्ण ने कहा कि योग तो तुम्हें करना पड़ेगा। अन्त में ऊधौ पहाड़ों की तरफ चले गये। तो जीवों का कल्याण औतारी शक्तियाँ नहीं करती हैं।

उनका कल्याण तो सन्त किया करते हैं। वे समरथ होते हैं और कुछ भी कर सकते है। जीव उन्हें जानता नहीं है क्योंकि वे बहुत सीधे साधे सरल वेश में पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। वे चलते फिरते तीरथ हैं। जहाँ भी उनके चरण पड़ जाते हैं वह तीर्थ बन जाता है।

औतारी शक्तियाँ (hand power) इस भू-मण्डल पर

सदियों तक उस स्थान की धूलि उठाकर लोक मत्थे लगाते हैं। हजारों काल की औतारी शक्तियाँ इस भू-मण्डल पर आवें और चली जायें वे कुछ नहीं कर सकती हैं और न कोई उन्हें जान सकता है। जब सन्त (Sant) उन्हें मान्यता देते हैं तभी लोग उन्हें जानने लगते हैं। औतारी शक्तियाँ सन्तों से बराबर डरती रहती हैं।

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परमात्मा के मिलन का भेद (Parmatam)

तो मैं तुम्हें परमात्मा के मिलन (Bhagvaan ke Milne) का भेद बताता हूँ। तुम्हारी आत्मा दोनों आंखो के पीछे बैठी हुई है और उसे अपनी कुछ भी खबर नहीं है। वहीं से बैठकर संपूर्ण शरीर में अपनी चेतना (consciousness) को, अपने प्रकाश को फैलाये हुये है। उसकी आँख और उसके कान बन्द हो गये हैं।

उसे खबर ही नहीं है कि वह आनन्द के देश की रहने वाली है। सन्त महात्मा जब उसे मिलते हैं तो उसे समझाते हैं कि ऐ मनुष्य शशीर में रहने वाली जीवात्माओं तुम चेतन हो, जड़ नहीं हो, तुममें भी यही शक्ति है जो में है। फर्क केवल इतना ही है कि कर्मों से तुम गन्दी हो गई हो तुम्हें अपना होश नहीं है।

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आप सन्तों के पास जाओ, वे आप के पापों को माफ कर देंगे। उनको छोड़कर कोई भी आप के गुनाहों को माफ नहीं कर सकता है। वे हर प्रकार से समरथ होते हैं और आपको जगाने के लिए ही वे बराबर भूमण्डल पर आया करते हैं।

ध्यान योग इसकी विधि Dhyan Kaise Kare

ध्यान योग इसकी विधि महात्माओं के माध्यम से की जा सकती है। क्योंकि महात्मा इस प्रक्रिया को पहले साकार करते हैं फिर इसके बाद आपने आने वाले शरणागत भक्तों के साथ ध्यान योग प्रक्रिया का अभ्यास कराते हैं। इस ध्यान योग प्रक्रिया अथवा ध्यान कैसे करें (Dhyan Kaise Kare) सब कुछ महात्मा बतलाते हैं।

आप सत्संग में बैठ कर के इस प्रक्रिया ध्यान कैसे करें सीख सकते हैं और इस जीवात्मा को परमात्मा से मिलने का सुझाव या रास्ता पा सकते हैं। यह तभी संभव हो सकता है जब हम पूर्ण महात्मा के सत्संग में पहुँचे और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें।

दो शब्द

महानुभाव अपने ऊपर दिए गए सत्संग आर्टिकल के माध्यम से यह जाना कि Dhyan Kaise Kare और कैसे हम अपनी जीवात्मा को जगा सकते हैं? यह काल का देश है यहाँ कॉल शक्तियाँ हमें परमात्मा से जुड़ने का कार्य नहीं करती है। बल्कि परमात्मा से जुड़ने का कार्य वही करता है जो परमात्मा को जानता हो, यह तभी संभव हो सकता है जब हम पूर्ण महात्मा की खोज करें। आशा है आपको ऊपर दिया गया कंटेंट जरूर अच्छा लगा होगा। जय गुरुदेव मालिक की दया सब पर बनी रहे।

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