इंसान की तीसरी आँख का रहस्य। प्रेत योनियों का विधान

Jai Gurudev
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जय गुरुदेव, इंसान की तीसरी आँख का रहस्य बाबा जयगुरुदेव उन्होंने सत्संग सुनाते हुए बताया है कि इंसान की तीसरी आँख भी होती है। तीसरा नाक भी होती है। तीसरी कान भी होता है। बाबा जी ने अपने करोड़ों अनुयायियों के साथ सत्संग में यह बात कही, आज भी इंसान अपनी तीसरी आँख खोल सकता है। जिसे शिव नेत्र कहते हैं। ज्ञान चक्षु कहते हैं। इस आर्टिकल में आप पढ़ेंगे, बाबा जी ने तीसरी आँख की रहस्य के बारे में क्या कहा जानते हैं।

इंसान की तीसरी आँख का रहस्य (Secret of human third eye)

बाबा जय गुरुदेव जी ने अपने सत्संग में तीसरी आँख के बारे में कहा है कि पहले मूर्ति पूजा नहीं थी। पर जब आप लोगों का ईश्वर से ध्यान हट गया और आपकी जीवात्मा की आँख तीसरी आँख बंद हो गई है। तो आप मूर्ति पूजा करने लगे हैं, पहले आप की तीसरी आँख दिव्य आँख से ईश्वर का दर्शन करते थे। लेकिन जब तीसरी आँख का आवरण आ गया तो आँख बंद हो गई,

व्यास जी ने नैमिषारण्य में भगवत लिखी थी। उन्होंने सोचा था कि जीवो को परमात्मा की ओर कैसे लगाया जाए, तो उन्होंने बड़े-बड़े आदर्श पुरुषों की बड़ी-बड़ी आंखों वाली मूर्तियाँ बनाई और उनकी स्थापना एकांत में की और आदेश दिया कि जाओ नदी के किनारे पर दूर-दूर बैठकर अपनी आंखों से एकटक देखना।

दृष्टि से दृष्टि न हिले जैसे ही तुम्हारी आँख उसकी आँख पर रुक जाए, तो बाहर की आँख बंद करना, तो अंदर की आँख खुल जाएगी। यह उन्होंने बताया था ये साधन जीवात्मा को जगाने के लिए कि यह सदा जागती रहे और इसकी आँख, कान, नाक पर कोई गंदगी ना पड़े।

इंसान मकान काल भगवान का बनाया- (Man made house god made)

इंसान की तीसरी आँख के रहस्य को आपने थोड़े दिन तक तो याद किया। बाद में यह भी छूट गया और इस मूर्ति को तोड़ा, उस मूर्ति को तोड़ा और फिर तोड़ने लगे। उसके बाद व्यसनों में फंस गए, जीव हिंसा में फंस गए यह इंसान मकान तो काल भगवान का बनाया हुआ है।

तुम्हारा तो है नहीं, इसको तुमको किराए पर दिया और कहा कि शुद्ध साफ़ रखना। जैसे ही मैंने तुमको शुद्ध साफ़ दिया वैसे ही मुझको दे देना। मकान तो वापस मैं ले लूंगा। मेरा मकान को अगर आपने गंदा किया तो मैं कठोर दंड दूंगा।

आपने इसे व्यसन में लगा दिया। इसको मार दो, उसको मार दो, बच्चों को मार दो, पक्षियों को मार दो, सब को मार डाला। इसमें आपको आनंद थोड़े ही मिलेगा। क्या खाने में आनंद मिलेगा? तो कहा गया आपका आनंद आपके इस संसार में आनंद कहीं नामोनिशान नहीं है।

ये जो आपको छाड़ीक ठंडक मिलती है वह तो जीवात्मा की छानकर ठंडक मिलती है और तुम्हारी इंद्रियों को मिलती है। वह तुम्हारा क्षणिक आनंद है। वह तो कह रहा है। कि मैं कल रूप हूँ अच्छे बुरे कार्यों का सजा दूंगा।

अच्छे बुरे कर्म की सजा मिलेगी- (Good bad karma will be punished)

“कॉल रूप में तिन्ह कर भ्राता, शुभ और अशुभ कर्म फल दाता” क्या वह छोड़ देगा? वह साफ़ कह रहा है कि पाप पुण्य जो भी अच्छे बुरे कर्म तुम करोगे। मय ब्याज के तुमको अपना कर्म फल सब भोगना पड़ेगा। इतना बड़ा जनसमुदाय नैमिशराय में आपने देखा नहीं होगा।

जो आपको समक्ष दिखाई दे रहा है। उसके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता। लेकिन यह सब आपकी चर्चा है और आपके बीच रहेगी कि जब से द्वापर ख़त्म हुआ, जब से यहाँ ऋषि मुनि आए होंगे उसके बाद से इस तरह का बड़ा जनसमुदाय यहाँ कभी नहीं आया। मैं इसी बात को कहना चाहता हूँ की पवित्रता को सब लोगों को रखना चाहिए,

प्रेत योनियों का विधान- (Phantom vagaries)

जब आपने अपने इतने जघन्य अपराध किये कि 5 महीने का बच्चा गर्भ में गिरा दिया, आदमी को मार दिया, किसी औरत को मार दिया, मुर्गी को मार दिया, भैंस सूअर बकरा खरगोश को मार दिया। यह जितने जीव जंतुओं की हत्या करते हो उन सब को उस आयु के सांसो की पूंजी पूरी करने के लिए प्रेत योनि मिलती है।

उस शरीर में जिसका समय बाक़ी रह गया है तब तक प्रीत योनि में रहते जब तक सांसों की पूंजी पूरी नहीं हो जाती। प्रेत योनि सबसे खराब होनी है। प्रेतों का पेट बड़ा होता है और भूख बहुत ज़्यादा लगती है। इससे ज़्यादा लगती है कि वह भूख के मारे पागल रहता है।

उसके मुंह का छेद इतना छोटा रहता है कि उसमें चावल या कोई चीज नहीं जा सकती। इसलिए प्रेत योनि बहुत बड़ी दुखदाई होती है। जब आपने जीवो को बीच में ही मार दिया। समय पूरा नहीं हुआ तो वह किसको लगेगा। हमको लगेगा जो आप काम करोगे उसको लग जाएगा।

इंसान को भूत क्यों लगता है?- (Why does a human believe a ghost)

लड़की लड़के को लग जाएगा, औरत को, पति को लग जाएगा, तो बीमारी लग जाएगी। फिर दवा खाते रहना फिर दूसरी प्रेतात्मा लग जाएंगे। फिर तीसरी लग जाएगी और दवा खाते रहना यही सब होता रहेगा और अच्छा नहीं होगा। आप यह कर्म विधान समझाते नहीं हो कि किस का क्या विधान है।

इसको योगी लोग ही जानते हैं कि वास्तव में कैसा विधान है। आप इसको ऊपर की बुद्धि के समझना चाहते हो, तो ऊपर की बुद्धि से नहीं समझ सकते, बाबा जी ने कहा है कि जब से आपका राज्य हुआ। इतनी हिंसा हुई इतने आदमी पशु पक्षी जानवर मारे गए इनकी जीव आत्मा भूत योनि में चली गई,

सब हो भूत गए एक दफे हमने काफ़िला निकला था तो भूतों ने हमसे कहा कि आप हमसे कुछ काम ले लीजिए, हमने कहा कि हम कोई काम नहीं लेंगे। वे कहने लगे हमारा काम तो देख लीजिए, तो हमने कहा दिखाइए. उन्होंने काफिले में बड़े-बड़े अनुभव दिखाए,

अपने लिए तो कुछ नहीं, अगर भूतों से काम ले लूं तो। आपको रात में उठाएंगे और ऐसी बात कहेंगे कि आप उनकी बात को सुनकर रात्रि में ही उठकर अंधेरे में उनके साथ चल देंगे। लेकिन मैंने उन भूतों से कोई काम नहीं लिया। उन्होंने कहा था हम को तो कहते हैं कि जो भी जीवात्मा है और भूत प्रेत योनि में बंद है। बहुत दुख उठा रही हैं।

भूत प्रेत कैसे दूर होगा- (How far will the ghost haunt)

काशी में जिन पर भूत लगा था वह लोग गए और उन्होंने पूरे दिन परिक्रमा लगाया। वह लोग भूतों को छोड़कर चले आए और भूतों वही रह गए, जिन पर भूत लगा था और उन्होंने ध्यान नहीं दिया। नहीं समझे पाए देर से गए या गए ही नहीं तो, उनके साथ भूत चले गए, तो तुम उनसे कहो कि चलो नैमिषारण्य में आ जाओ,

यहाँ हरदोई रोड पर नदी के पुल के किनारे जो भूतों की यज्ञशाला बनी है। भूत वालों को लेकर वहाँ आए और रात के 10: 30 बजे से 3: 00 बजे तक उस यज्ञशाला के हवन कुंड की परिक्रमा लगाओ, तो भूत वही छूट जाएगा। प्रयास करोगे तो छोड़ेगा। क्योंकि जो कर्जा है आपसे वसूल करेगा वैसे आपको छोड़ने वाला नहीं है,

आपको उन से छूटने का तरीक़ा भी मालूम है। बाबा जी ने कहा कि हम चाहते हैं कि तुम परेशानियों में भी ना हो और ख़र्चा भी ना करना पड़े। नहीं तो दवा से अच्छा होने वाला नहीं है। चाहे जितनी दवा करो, जितनी दवा खिलाओगे उतना ही रोग बढ़ेगा।

एक तो लगा ही था और उधर से भी लग गया, तब इंग्लैंड अमेरिका जाओगे। दिल्ली जाओ ठीक होने वाले नहीं, वह तो कहेंगे कि हमारा कर्जा दे दो तब वह छोड़ेगा। वही तरीके से छोड़ेगा। वह यज्ञशाला में जाओ वहाँ अँधेरा ही रहेगा। बत्ती नहीं जलाई जाएगी भी अंधेरे में ही भोजन करेंगे।

भूत का भोजन क्या है? (What is ghost food)

क्योंकि अंधेरे की चीज है। उजाले की नहीं, वहाँ जब अपनी खुराक पा जाएगा तो खुश हो जाएगा और कहेगा कि तुम जाओ हम तुम्हारे तुमको छोड़ दे रहे हैं। वहाँ जाओ देखो वहाँ हवन है। हवन कुंड में इन को भोजन देने के लिए दो-तीन आदमी वहाँ रहेंगे।

उसमें जो धुआं उठेगा वही उनका भोजन है। जब वह भोजन करेंगे तो वहाँ तरह-तरह के अनुभव करेंगे, वह भोजन कराने वाले से कह दिया है कि उस से डरेंगे नहीं। बे ऐसी चीज दिखाएंगे कि आप हैरान रह जाओगे।

मैं आपको यही मंच से बता देता हूँ। वहाँ है तो बहुत, आप से बोलेंगे नहीं तुम लोग उनको देखोगे तो डर जाओगे। इसलिए उनसे प्रार्थना कर रखी है कि किसी को डराना नहीं तो आप वहाँ जाओ. उनको भोजन कराओ. वहाँ उनको भोजन मिल रहा है वह छोड़ देंगे, वहाँ भी तो जीवात्मा है।

मुर्गी के लड़के-लड़के को मार दिया, गर्भपात करा दिया। भूत बन गए. बराबर बना रहेंगे ऐसे छोड़ने वाला नहीं है। अपना बदला लेंगे। यह ज्ञान आपको पता नहीं है, मैं तुम्हारे हित की बात करता हूँ।

मैं तुम इधर उधर की बात मत समझो। यह इधर-उधर की बात नहीं है। जो सच है वह मैं आपको बता रहा हूँ। यहाँ चलकर आए हो तो आपको एक भी नुक़सान होने वाला नहीं है। यहाँ जो तुम खा रहे हो, ख़र्च करते हो, इन सब का साथ सत प्रतिशत से ज़्यादा तुम्हारी खेती दुकान दफ्तर में ले लो। लेकिन इसके लेने का तरीक़ा है। जो बीमारी तकलीफ में कोहराम होना होगा, वह मुक्त है।

परिवर्तन के मोड़ पर समय- (Time at the point of change)

समय बड़ी तेजी से लड़खड़ा रहा है। कब किधर क्या हो जाए, इसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। समय का यह उतार-चढ़ाव किस बिंदु पर जाकर रुकेगा। यह भी हमारी सोच से परे है। लेकिन इतिहास बताता है कि लड़खड़ा का समय जहाँ-जहाँ रुकता है। वहाँ एक तरफ़ विनाश का अंत होता है। दूसरी तरफ़ नई किरण छूटती है नई किरण दिखता है।

तो हमें व्यक्तिगत अपनी जिम्मेदारी उठानी है किसी की आलोचना और निंदा को अब कोई ज़रूरत नहीं है। अब अपने आप को सुधारना व मोड़ना है। क्योंकि हम बिगड़ते हैं समय बिगड़ता है। हम सुधर हैं हमारा समय सुधरता है। दैविक शक्तियाँ उधर अपना काम करती हैं। अपने को मोड़ने का आधार चाहिए,

आज आधार के युग पुरुष परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज हैं जिनका संदेश लोगों के नवचेतना भर रहा है। मानव धर्म ला रहा है। हम भी उनसे जुड़े, हम बदल जाएंगे मानव धर्म मानव कर्म किस एक जाति वर्ण या समाज की विरासत नहीं है।

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समस्त मानव जाति का अधिकार-(Rights of all mankind)

यह तो समस्त मानव जाति का अधिकार है बुराइयाँ सबके लिए बुरी है। अच्छाइयाँ सबके लिए अच्छी हैं। इनका कोई अपवाद नहीं है। खुदा है, भगवान है, अल्लाह है, रब है, ब्रह्मा है पारब्रह्म है। इन सब के परे सबका सिरजनहार कुल मालिक रहता है।

वहाँ जीते जी इसी इंसान शरीर से आत्मा को जगा कर पहुँचाया जा सकता है। उनका दर्शन दीदार अपनी तीसरी आँख खोलकर किया जा सकता है। जो आत्मा वहाँ पहुँची उन्होंने लोगों को बताया।

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वह इस पृथ्वी पर संत के रूप में आए, फ़क़ीर के रूप में आए, आप भी आकर उनके संदेश को उनके पैगाम को सुनो। तो आपकी समझ में आएगा कि मनुष्य जीवात्मा का उद्देश्य क्या है? मानव धर्म मानव कर्म क्या है? वह आनी-आनी आध्यात्मिक ज्ञान क्या है। जय गुरुदेव

पोस्ट निष्कर्ष-Post conclusion

महानुभाव इस पोस्ट में परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा नैमिषारण्य में दिए गए सत्संग में, बाबा जी ने तीसरी आँख के रहस्य के बारे में और साथ में भूत प्रेत योनियों के बारे में सत्संग में लोगों के साथ महत्त्वपूर्ण बातों को सांझा कि आशा है आपको यह बाबा जी का सत्संग ज़रूर अच्छा लगा होगा। इस आर्टिकल को आप ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें, धन्यवाद

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3 thoughts on “इंसान की तीसरी आँख का रहस्य। प्रेत योनियों का विधान”

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